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वाह रे देश की भारतीय राजनीति ??

भारत की जनता का भविष्य राजनीति तय करती है,लेकिन देश की जनता अपना भविष्य..?

♦️ भारत टाइम्स न्यूज♦️

   (शीतल निर्भीक ब्यूरो)

नई दिल्ली।स्वयं का विचार यदि स्वयं के व्यवहार से मेल नहीं खाता है, तो छल कपट का प्रभाव तो बढ़ेगा ही। ये शब्द हमारे समय की सच्चाई को बखूबी बयां करती हैं। भारत के दर्शन और राजनीति के बीच यह एक महत्वपूर्ण विचारधारा का संघर्ष है।

एडवोकेट रीता भुइयार, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख आवाज हैं, जिन्होंने इस समस्या पर गहरी चिंतनशीलता व्यक्त की है। उनके अनुसार भारत की जनता का भविष्य भारत की राजनीति तय करती है, लेकिन यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या भारत की जनता अपना भविष्य खुद तय करती है?

भारत के दर्शन में सदैव सच्चाई, नैतिकता और सामाजिक न्याय का महत्व रहा है। लेकिन, जब राजनीति में यही मूल्यों का ह्रास होता है, तो समाज में छल और कपट का प्रभाव बढ़ता है। रीता भुइयार का मानना है कि भारतीय राजनीति को अपने विचारों और व्यवहार के बीच सामंजस्य बिठाना होगा, ताकि जनता का विश्वास बरकरार रह सके।

वरिष्ठ अधिवक्ता रीता भुइयार कहती हैं कि भारत की राजनीति में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की कमी ने जनता में असंतोष को जन्म दिया है। जब नेता अपने वादों को निभाने में विफल होते हैं और अपने कार्यों से विपरीत आचरण करते हैं, तो यह जनता के लिए एक गहरा धोखा होता है।

भविष्य की दिशा निर्धारित करने के लिए भारत की जनता को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना होगा।रीता भुइयार के अनुसार शिक्षा, जागरूकता और सक्रिय भागीदारी से ही जनता अपने भविष्य को सही दिशा में मोड़ सकती है।

भारतीय समाज में एक नई सोच और परिवर्तन की लहर उठ रही है, जहां लोग अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। इस नई सोच का समर्थन और नेतृत्व देने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता रीता भुइयार जैसे नेताओं की आवश्यकता है, जो न केवल जनता की समस्याओं को समझें बल्कि उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम भी उठाएं।

वरिष्ठ अधिवक्ता रीता भुइयार का यह दृष्टिकोण हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारी राजनीति और हमारे दर्शन में सामंजस्य है? क्या हम वाकई अपने विचारों और व्यवहार में ईमानदार हैं? इन सवालों का उत्तर ही हमें एक बेहतर और समृद्ध भारत की ओर ले जा सकता है!

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